भारतीय संविधान का ऐतिहासिक पृष्ठभूमि -2

भारतीय संविधान का ऐतिहासिक पृष्ठभूमि -2

1813 का चार्टर अधिनियम

–ब्रिटिश भारत के केन्द्रीकरण की दिशा में यह अधिनियम निर्णायक कदम था |

इस अधिनियम की मुख्य विशेषताए –

1.  इसने बंगाल के गवर्नर जेनरल को भारत का गवर्नर जनरल बना दिया ,जिसमें सभी नागरिक और सैन्य शक्तियां निहित थी |इस अधिनियम ने पहली बार एक ऐसी सरकार का निर्माण किया ,जिसका ब्रिटिश कब्जे वाले सम्पूर्ण भारतीय क्षेत्र पर नियंत्रण था |इस अधिनियम के तहत बनाने वाले प्रथम गवर्नर जनरल लार्ड विलियम बैंटिंग थे |

2 .इसके अंतर्ग्रत पहले बनाये गये कानूनो को नियामक कानून कहा गया और नए कानून को एक्ट या अधिनियम कहा गया |

3. ईस्ट इण्डिया कंपनी की एक व्यापारिक निकाय के रूप में की जाने वाली गतिविधियों को समाप्त कर दिया अब यह सिर्फ प्रशासनिक निकाय बन गया |

.चार्टर एक्ट 1833 में सिविल सेवको के लिए खुली प्रतियोगिता का आयोजन शुरू करने का प्रयास किया |इसमें कहा गया की कम्पनियों में भारतीयों को किसी पद कार्यालय और रोजगार को पाने से वंचित नहीं किया जायेगा |इसे समाप्त कर दिया (कोर्ट आँफ डायरेक्टर के विरोध के के कारण )

 

1854 का चार्टर अधिनियम

  • 1793 से 1853 के दौरान पारित किये अधिनियमों की श्रंखला का अंतिम चार्टर अधिनियम था |

इस अधिनियम की मुख्य विशेषताए –

1. इसमे पहली बार गवर्नर जेनरल की परिषद के विधायी एवं प्रशासनिक कार्यो को अलग कर दिया इसके तहत परिषद में 6 नए पार्षद जोड़े गये इन्हें विधान पार्षद कहा गया |जिसे भारतीय (केन्द्रीय )विधान परिषद कहा गया |परिषद् की इस शाखा ने छोटी संसद की तरह कम किया |

इसने सिविल सेवको की भर्ती एवं चयन हेतु खुली प्रतियोगिता का शुभारम्भ किया ,एस प्रकार विशिस्ट नागरिक सेवा भारतीयों के लिए भी खोल दी |और इसके लिए 1854 में (भारतीय सिविल सेवा के संबध में ) मैकाले समिति की नियुक्त की गयी|

3. इसमे पहली बार भारतीय केन्द्रीय विधान परिषद में स्थानीय प्रतिनिधित्व प्रारम्भ किया ,गवर्नर जनरल की परिषद में 6 नए सदस्यों में से ,चार का चुनाव बंगाल ,मद्रास ,बम्बई और आगरा को स्थानीय प्रांतीय सरकारों द्वारा किया जाना था |

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